कोटा। राजस्थान के कोटा स्थित अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क की बाघिन महक इन दिनों अपनी उम्र को लेकर चर्चा में है। महक ने 22 साल पूरे कर लिए हैं और अब 23वें साल में प्रवेश कर चुकी है। खास बात यह है कि इतनी उम्र होने के बावजूद वह अभी भी अपने इन्क्लोजर में सक्रिय रहती है, घूमती है और पानी में अठखेलियां करती नजर आती है।
आमतौर पर चिड़ियाघरों में बाघ और बाघिन की उम्र करीब 16 से 18 साल मानी जाती है। ऐसे में महक का 22 साल की उम्र तक स्वस्थ और सक्रिय रहना उसे बेहद खास बनाता है।
28 अगस्त 2004 को जयपुर में हुआ था महक का जन्म
महक का जन्म 28 अगस्त 2004 को जयपुर चिड़ियाघर में हुआ था। उसकी मां बाघिन ‘चंदा’ ने चार शावकों को जन्म दिया था, जिनमें रुद्र, गौरी, रंभा और महक शामिल थे।
समय के साथ चारों अलग-अलग स्थानों पर चले गए। महक को मार्च 2012 में जयपुर से कोटा चिड़ियाघर लाया गया। बाद में 2019 में उसे ब्रीडिंग के उद्देश्य से नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क भेजा गया।
22 साल की उम्र में भी महक है एक्टिव
महक की उम्र भले ही 22 साल हो गई है, लेकिन उसकी गतिविधियां अभी भी काफी अच्छी हैं। वह अपने इन्क्लोजर में घूमती है, पानी में उतरती है और अपना खाना अच्छी तरह खाती है।
हालांकि उम्र का असर उस पर भी दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब उसे उठने में पहले की तुलना में थोड़ी परेशानी होती है और कमजोरी से बचाने के लिए उसकी कैल्शियम डोज बढ़ाई गई है। इसके बावजूद 22 साल की उम्र में उसकी फिटनेस को असाधारण माना जा रहा है।
महक की लंबी उम्र का क्या है राज?
महक की लंबी उम्र के पीछे कई संभावित कारण बताए जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बेहतर और संतुलित भोजन, नियमित मेडिकल जांच, सुरक्षित वातावरण और देखभाल इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा जेनेटिक्स यानी आनुवंशिक क्षमता भी किसी जानवर की उम्र और स्वास्थ्य में भूमिका निभा सकती है। हालांकि किसी एक कारण को महक की लंबी उम्र का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।
रोजाना मिलती है खास डाइट
अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में महक के खान-पान का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, उसे रोजाना करीब 8 किलो चिकन और पाड़े का मांस दिया जाता है। इसके साथ मल्टीविटामिन, कैल्शियम और आयरन टॉनिक भी दिए जाते हैं।
बढ़ती उम्र को देखते हुए उसकी डाइट और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाती है।
हर कुछ दिनों में होती है मेडिकल निगरानी
22 साल की उम्र में महक की स्वास्थ्य निगरानी भी सामान्य बाघिनों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उसकी करीब हर तीन-चार दिन में या सप्ताह में दो बार मेडिकल जांच की जाती है।
उसके खाने, वजन, गतिविधियों और व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जाती है, ताकि किसी स्वास्थ्य समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।
नाहर के साथ हुई थी ब्रीडिंग की कोशिश
महक को साल 2019 में ब्रीडिंग के उद्देश्य से नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क भेजा गया था, जहां उसे बाघ नाहर के साथ रखा गया। बाद में 1 मार्च 2023 को दोनों को वापस कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क लाया गया।
हालांकि महक और नाहर की ब्रीडिंग सफल नहीं हो सकी। इसके बाद नाहर की मौत हो गई और अब महक अकेली रहती है।
क्यों खास है महक की 22 साल की उम्र?
चिड़ियाघरों में बाघों की सामान्य उम्र करीब 16 से 18 साल बताई जाती है। जंगल में जीवन और भी चुनौतीपूर्ण होता है, जहां शिकार, क्षेत्रीय संघर्ष, चोट और बीमारियों का खतरा रहता है।
ऐसे में 22 साल की उम्र तक पहुंचना और इस उम्र में भी सक्रिय रहना महक को खास बनाता है। वह सामान्य चिड़ियाघर वाली औसत उम्र से कई साल आगे निकल चुकी है।
महक की कहानी वन्यजीव संरक्षण की मिसाल
महक की कहानी सिर्फ एक उम्रदराज बाघिन की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि सुरक्षित वातावरण, नियमित देखभाल, उचित भोजन और स्वास्थ्य निगरानी वन्यजीवों के जीवन में कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
22 साल की उम्र में भी महक का सक्रिय रहना वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का विषय बना हुआ है। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में उसकी मौजूदगी पर्यटकों को भी आकर्षित करती है।









