केंद्रीय मंत्री ने रक्षाबंधन के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर दिया जोर, खेजड़ली बलिदान से पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा लेने की अपील
जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री और जोधपुर सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने रक्षाबंधन के अवसर पर देशवासियों और सभी बहनों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रक्षाबंधन के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में रक्षा सूत्र केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह सुरक्षा, सहयोग और विश्वास के संकल्प का प्रतीक रहा है।
रक्षा सूत्र सुरक्षा और जिम्मेदारी का प्रतीक
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारतीय सभ्यता में जिसे भी रक्षा और सुरक्षा की कामना की जाती थी, उसे रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा रही है। प्रकृति, पर्यावरण, माता-पिता, गुरु, स्वामी और गौ माता सहित प्रकृति के विभिन्न घटकों के प्रति भी रक्षा का संकल्प लेने का विधान रहा है।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व बहनों की रक्षा का भरोसा और विश्वास दिलाने के साथ-साथ प्रकृति एवं पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी संकल्प लेने का अवसर देता है।
रक्षाबंधन हमें जिम्मेदारियों से जोड़ता है
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में त्योहारों की लंबी श्रृंखला में रक्षाबंधन ऐसा पर्व है, जो लोगों को उनकी जिम्मेदारियों और दायित्वों से जोड़ता है। यह पर्व भाई-बहन के स्नेह और विश्वास के साथ समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।
खेजड़ली बलिदान को किया याद
शेखावत ने राजस्थान की पर्यावरण संरक्षण की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए खेजड़ली बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती ने प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए बलिदान की मिसाल कायम की है।
उन्होंने बताया कि खेजड़ली में 363 माताओं और बहनों ने वृक्षों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था। यह बलिदान आज भी पर्यावरण संरक्षण के लिए समाज को प्रेरणा देता है।
नेपाल की प्राकृतिक आपदा और पर्यावरण परिवर्तन का किया जिक्र
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज जब नेपाल में प्राकृतिक आपदा और पूरी दुनिया के सामने पर्यावरण परिवर्तन की चुनौतियां दिखाई दे रही हैं, ऐसे समय में अमृता देवी और खेजड़ली के बलिदान से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
उन्होंने रक्षाबंधन के अवसर पर पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा को भी सामूहिक जिम्मेदारी मानते हुए लोगों से इसके प्रति जागरूक होने का आह्वान किया।









